यह पहला अवसर है, जब अमरीका के सबसे बड़े दुश्मन माने जाने वाले दुनिया के तीन महत्वपूर्ण देश संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं।
तीनों देशों ने इस सैन्य अभ्यास में भाग लेने के लिए अपने सबसे आधुनिक युद्धक जहाज़ों और सैन्य उपकरणों को ओमान सागर में तैनात किया है।
ईरान के नेवी कमांडर रियर एडमिरल हुसैन ख़ानज़दी का कहना है कि क्षेत्र के बहुत ही महत्वपूर्ण जलमार्गों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह सैन्य अभ्यास किया जा रहा है।
ईरानी फ्लोटिला के प्रमुख रियर एडमिरल ग़ुलाम रज़ा ताहानी ने कहा है कि यह युद्धाभ्यास 17,000 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में किया जा रहा है, जिसमें "युद्ध की विभिन्न रणनीतियों का अभ्यास" किया जाएगा।
इस सैन्य अभ्यास का किया उद्देश्य है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाना, समुद्री डकैती और आतंकवादा का मुक़ाबला करना और आपसी ख़ुफ़िया जानकारियों का आदान प्रदान करना इसके मुख्य उद्देश्य हैं।
ताहानी का कहना था कि तीनों ही देश दुनिया को यह भी संदेश देना चाहते हैं कि तेहरान, मास्को और बीजिंग के बीच सहयोग एक सार्थक स्तर पर पहुंच गया है।
ग़ौरतलब है कि इस साल फ़ार्स खाड़ी में कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी हैं। इसकी शुरूआत मई में ओमान सागर स्थित यूएई की एक बंदरगाह में सऊदी अरब के दो ऑयल टैंकरों समेत चार ऑयल टैंकरों पर हमला हुआ, जिसका राज़ अभी तक नहीं खुल पाया है कि इन हमलों के पीछे कौन था।
हालांकि बग़ैर किसी सुबूत के अमरीका और उसके सहयोगियों ने ईरान पर इसका आरोप लगाया था, लेकिन ईरान ने इसे निराधार बताते हुए ख़ारिज कर दिया था।
उसके बाद जून में इसी तरह के एक हमले में ओमान सागर से गुज़रते हुए समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आकर दो ऑयल टैंकर नष्ट हो गए थे।
इन हमलों के बाद, अमरीका ने फ़ार्स खाड़ी की निगरानी के लिए एक संयुक्त फ़ोर्स के गठन का काफ़ी प्रयास किया। हालांकि ईरान ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि वह स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ से गुज़रने वाले जहाज़ों को सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है और इलाक़े में किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप से हालात ख़राब हो सकते हैं।